शॉटगन मैरिज सीरिज़ 1 | SHOTGUN MARRIAGE SERIES 1| By M.S. Ardor
“Shotgun Marriage Series 1 - A Passionate Indian Love Saga" शॉटगन मैरिज SHOTGUN MARRIAGE By M.S. Ardor जाह्नवी शिवराज सिंह, जो की BDO बनना चाहती है। वह अपने जमींदार भाई, अभिमन्यु शिवराज सिंह की लाडली बहन है। एक दिन उसकी शादी ज़बरदस्ती करवा दी जाती है, और वो भी उसकी बेस्ट फ्रेंड रुद्री विक्रमजीत रॉय के शादी के मंडप में। पर किसे पता था की उसकी शादी जिससे ज़बरदस्ती करवाई जा रही है? वह देश के सबसे मशहूर बिजनेस मेन में से एक है उसका नाम है निश्चय अविराज चौहान। वह C&M ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज़ का डीरेक्टर है। निश्चय बिल्कुल महादेव के रुद्र अवतार जैसा गुस्सैल स्वभाव का, केवल इशारों में बात करने वाला व्यक्ति है। आखिर ये शादी ज़बरदस्ती क्यूं करवाई गई? किस ने करवाई? क्या निश्चय इस शादी को मानेगा? जुगनू उर्फ़ जाह्नवी के बचपन के सपनों का क्या होगा? क्या जुगनू और निश्चय एक दूसरे को इस अनचाहे बंधन से मुक्त कर देंगे?या फिर एक दूसरे के प्रेम में खोकर, एक दूसरे के हो जाएंगे? आखिर ये ज़बरदस्ती की शादी कितने दिनों तक टिकेगी? क्या होगा गांव की सीधी साधी जुगनू के साथ? क्या होगा निश्चय की गर्ल फ्रेंड रोमिला का? इस रोचक प्रेम कहानी को जानने के लिए पढ़िये यह उपन्यास “शॉटगन मैरिज सीरीज़ 1 – अ पैशनेट इंडियन लव सागा” “नहीं, मैं बकवास नहीं कर रही हूँ। मणिकर्णिका सेना के लोग, इन साहब को मौत के घाट उतार देंगे। हम इनके यहाँ थोड़े दिन रहेंगे। अपनी पढ़ाई पर अपना पूरा फोकस करेंगे। जब सिलेक्शन हो जाएगा। फिर उसके बाद हमारा ट्रेनिंग होगा। उसके बाद ट्रांसफर हो जाएगा। हम अपने ब्लाक में चले जाएंगे। अपना काम करेंगे और आराम से तलाक ले लेंगे।” रुद्री और दुसरे लोग सोच में पड गए। “और तलाक क्या लेना? मैरिज रजिस्टर नहीं करवाएंगे, तो समझो की तलाक ही है। ये तो हम समाज के सामने इस अनचाहे बंधन में फंस गए हैं। गांव के सामने... लोगों के सामने... ये सारा शॉटगन मैरिज का ड्रामा हुआ है। इसीलिए थोड़े दिनों तक झूठमूठ का इसे निभाने का नाटक करना पड़ेगा,” जाह्नवी ने सारी बात को समझाते हुए कहा। विक्रमजीत ने सोचते हुए कहा, “जुगनू, हमें तो यह शादी ठीक ही लग रही है। निश्चय एक अच्छा लड़का है।” रुद्री ने चिढ़ते हुए कहा, “पिताजी ये आप क्या बोल रहे हैं? जुगनू और निश्चय की ज़बरदस्ती की शादी करवाई गई है। नाहीं निश्चय को ये शादी मंजूर है और नाहीं जुगनू को... ऊपर से आप कह रहे हैं, की शादी ठीक हुई है।” सुवर्णा ने बीच में बोलते हुए कहा, “रुद्री तुम कम बोलो। तुम्हारे पिताजी ठीक कह रहे हैं। जब पिता जी ठीक कह रहे हैं। रणजीत सेन ने निश्चय के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “निश्चय मुझे यह लगता है, कि तुम जुगनू को अपने घर लेकर जाओ। अभी सबसे बड़ा चैलेंज तो भाईसाहब अविराज जगदीश चौहान जी हैं। वो C&M ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के ट्रस्टी डायरेक्टर हैं। वो M.B.A in Finance हैं। उनके लिए हर बात का मतलब होता है, ट्रांज़ेकशन (transaction)। पता नहीं तुम उनको कैसे कन्विंस करोगे?” निश्चय चुप था। अभिलाष ने अपना सिर पकड़ते हुए निश्चय की ओर देखा और कहा, “कहां से ये मणिकर्णिका सेना आ गई? सब कुछ जम्ब्ल (jumble) हो गया है। किसी का भी दिमाग काम नहीं कर रहा है। मुझे अफसोस हो रहा है, कि मैंने तुम्हें बेकार में अपनी शादी में बुलाया।” विश्वा ने कहा, “भैया, रिलैक्स! अब तो शादी हो गई है। अब किसने बुलाया? क्यों बुलाया? शादी क्यों हुई है? यह सब सोचने का वक्त नहीं है। मुझे तो ऐसा लगता है, कि जिस तरह से, जो भी हुआ है। अब बस जुगनू भाविक की विदाई की तैयारी करनी चाहिए।” प्रवीण ने अपना माथा रब करते हुए कहा, “मैं भी इस बात से राज़ी हूं। विश्वा ठीक कह रहा है, अब जो हुआ, सो हुआ। विदाई की तैयारी करते हैं और निश्चय जी के साथ में जुगनू भाविक को भेजते हैं। डर लग रहा है। तो सिर्फ अंकल जी का...। वह पक्का बिज़नेसमैन हैं। वे काफी स्ट्रिक्ट स्वभाव के हैं। उनके रगों में सिर्फ गुस्सा बहता है। अब आगे क्या होगा? यह तो सिर्फ महादेव की कृपा पर डिपेंड करता है।” वहीं थोड़ी दूर पर खडी, जान्हवी की विदाई की बात हुई, तो उसके आंखों से आंसू बह निकले। वह अभी भी अपने पिंक कलर के सुन्दर से सलवार कमीज़ में थी। उन्हीं कपड़ों में मणिकर्णिका सेना ने उसकी ज़बरदस्ती की शादी (शॉटगन मैरिज) निश्चय के साथ करवा दी थी। रुद्री उसके गले मिलकर रोने लगी। रोते-रोते रुद्री ने कहा, “यार, आय एम सॉरी। मेरे सामने तेरा सारा संसार उजड़ गया। मैं कुछ नहीं कर पाई। तेरे सपने बिखर गए। जुगनू, आय ऐम सो सॉरी..” जान्हवी ने अपने आंसुओं को बहने दिया और भरे हुए गले से कहा, “इसमें तेरी कोई गलती नहीं है। मेरे भाग्य में ऐसा ही लिखा हुआ था। और ऐसे ही होना था। मुझे लेकिन एक बात का बहुत अफसोस है। महादेव ने हम सभी के जीवन में इतनी तकलीफें क्यों लिखी हैं? बहुत दुख होता है—। मगर इसी में हम सब को जीना होगा। अभी तो पता नहीं, इन साहब के घर जाकर क्या क्या होगा?”


